श्रमिक फाउंडेशन भारत में एक गैर-लाभकारी संगठन है जो श्रमिकों के हक और अधिकारों के हित की बात करती है और यह "श्रमिकों के अधिकारों के लिए समर्पित " है । संस्था का उदेश्य इनके साथ कई विभिन्न स्तरों की गतिविधियों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, कौशल शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, महामारी या आपदाओं मे उचित पहल के साथ साथ बाजार केंद्रित आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से वंचितों के लिए एवं उनके परिवार के सभी सदस्य बच्चों, युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने हेतु प्रयत्नशील है । इन्ही सभी योजनाओं के बीच सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण पहल "श्रमिक फाउंडेशन स्वयं सहायता समूह" है ।
स्वयं सहायता समूह एक समुदाय के रूप में अपनी स्थानीय और रहने की स्थिति का समाधान खोजने के लिए आता है । यह समान उद्देश्य के लिए समान आर्थिक पृष्ठभूमि के साथ एक स्व-शासित सहकर्मी नियंत्रण समुदाय है । इस प्रकार स्वयं सहायता समूह गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के लिए बदलाव का माध्यम बन सकता है । स्वयं सहायता समूह का सदस्य स्वरोजगार और गरीबी उन्मूलन को प्रोत्साहित करने के लिए ही "स्वयं सहायता" की धारणा पर भरोसा करता है ।
हमारे देश में ग्रामीण गरीबी का एक कारण ऋण और वित्तीय सेवाओं तक कम पहुंच है । समान समुदाय में निचले क्षेत्रों में आसानी से श्रेय दिया जाना । पिछड़े और कमजोर 'अर्थशास्त्री वर्ग' के लिए कमाई का जरिया बन रहा श्रमिक फाउंडेशन लंबी देय तिथि और एक विश्वसनीय निर्धारित समय के लिए अधिकतम राशि पर कम स्व-ब्याज । यह एक सार्थक मासिक अनुमानित वेतन वाली स्व-नियोजित महिला एवं पुरुष श्रमिकों के लिए एक ट्रेसबैक है जो किसी भी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में एक मजबूती देने का कार्य करती है ।इस प्रकार अनुभव के आधार पर श्रमिक फाउंडेशन स्वयं सहायता समूह की रचना कर श्रमिकों के बीच इस पहल में सामुदायिक स्तर पर जिनकी आर्थिक एवं सामाजिक पहलुओं में समानता हो एक छोटे समूह के माध्यम से अपनी-अपनी आवश्यकताओं, समस्याओं, भावनाओं, अपेक्षाओं आदि उम्मीदों को लेकर निरंतर प्रयास कर रही है और श्रमिकों में अपनी-अपनी प्रक्रिया से उनके उत्साह को निरंतर जागृत कर उनके बीच का एक महत्वपूर्ण अंग बन रही है इसमे श्रमिक फाउंडेशन समान स्तर के सदस्य को वही सीखाने का प्रयास करते हैं जिनमें उन्हें रुचि लगती है। इन समान स्तरीय समूहों के सदस्यगण अपने-अपने ज्ञान के प्रति जागरूकता का स्वयं के अंदर की क्षमता को विकसित कर अपने व्यवहार में लाने के प्रति उत्साहित रहते हैं और सदस्य-समूह मुख्य रूप से अपने समूह के द्वारा स्वचालित होकर अग्रसर होने का प्रयास करते हैं। संस्था अपने प्रयास से समान स्तर के समूह के सदस्यों के साथ-साथ दूसरों को भी विकास की ओर लाने की सूझबुझ रखती है । हालांकि स्वयंसेवी संस्थाओं में देखा गया है कि स्वयं सहायता समूह अपने प्रयास की मदद से कुछ हद तक अपनी समस्याओं का समाधान करते हैं क्योंकि महिला द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूह में ऋण, महिलाओं के नाम से ही स्वीकृति होती है परन्तु आर्थिक कार्यकलाप उनका रिश्तेदार (पति, सुसर, आदि) कर रहे हैं और इस पूरी प्रक्रिया (निर्णय से लेकर कार्यान्वयन तक) में पुरुष वर्ग की संलग्नता रहती है और महिलाओं का मात्र नाम होताव है। इस अवस्था में महिला सशक्तिकरण की क्या दिशा और दशा होगी-यह सोचने की बात है और समाज देख भी रहा है इसलिए श्रमिक फाउंडेशन श्रमिकों की समूह बनाने में विश्वास रखते हुए महिला एवं पुरुष दोनों की स्वयं सहायता समूह निर्माण करता है जिसमें इनकी बचत की क्षमता सफलतापूर्ण हो सकें।
श्रमिक स्वयं सहायता समूह ऐसे श्रमिकों/व्यक्तियों का समूह होता है जो अपनी वर्तमान की स्वयं एवं सामाजिक परिस्थितियों को आर्थिक और जागरूकता स्वरूप अपनी सहायता स्वयं करना जानते हैं । समूह का उदेश्य समान सामाजिक एवं आर्थिक स्तर के व्यक्तियों का सामूहिक स्तर पर सशक्तिकरण करना है ।
स्वयं सहायता समूह एक व्यवस्थित संगठन होता है जो स्वयं संचालित होता है । यह न तो किसी विधि या अधिनियम के अन्तर्गरत और न ही पंजीकृत होना जरूरी होता है । समूह एक नियमावली पर आधारित होगी जिसमे समूह व्यक्तितव के आधार पर अपनी बनावट एवं कार्यपद्धति मे एक सीमा तक फेर बदल करने के लिए स्वतंत्र होगी ।
संस्था का लक्ष्य
- समूह के माध्यम से श्रमिकों के उत्थान हेतू ऋण जरूरतों को पूरा करने के लिए पूर्णरूपी लाभकारी ऋण नीतियों का विकास करना ।
- स्वयं सहायता समूह के उदेश्य मुख्य रूप से लाभार्थियों, कार्यकलापों एवं संगठन के स्तर पर अभिव्यक्त होता है जिससे लाभार्थियों के स्तर पर इसका उदेश्य है वंचित वर्गों के लोगों मे विशेषत: महिलाओं मे एकजुटता पैदा करना ।
- समूह से जुड़ें सभी शहरी/ग्रामीण श्रमिकों के बीच बैंक से परस्पर बेहतर विश्वास पैदा करना ।
- समूह से जुड़ें सभी श्रमिकों में बचत और ऋण दोनों तरह के बैंकिंग क्रियाकलापों का प्रोत्साहन करना ।
- समूह से जुड़ें सभी महिला श्रमिकों को उनके हक एवं अधिकारों के बारे मे बताना एवं सभी योजनाओं के साथ साथ समूह के महिला सदस्यों के बीच हर स्तर के सामाजिक कार्यों का गठन कर उन्हें बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर करना ।
- समूह के आर्थिक एवं सामाजिक समानता लाकर एक छोटे समूह के माध्यम से सभी सदस्यों की आवश्यकताओं, समस्याओं, भावनाओं, अपेक्षाओं आदि की उम्मीदों को लेकर निरंतर प्रयास करना ।
- चूंकि गरीब श्रमिकों मे बचत करने की अपार क्षमता होती है इसलिए उनके बीच रोजाना बचत करने की योजना बनाना ताकि वो आसानी से अपनी आय बढ़ा सकें ।
- समूह के किसी भी सदस्य को आकस्मिक स्थिति में सदैव उनके लिए संस्था द्वारा अग्रसारित रहना ।
- समूह के सदस्यों के बीच सामर्थ अनुसार उनके बचत के लिए प्रोत्साहित कर एकडूसरे की सहायता करना एवं बचत करवाना ।
- समूह से जुड़े सभी सदस्यों एवं उनके परिवार के सदस्यों के बीच हर संभव प्रयास के साथ सरकारी योजनाओं को जागरूक कर उनके बीच हर स्तर की योजनाओं को लाना एवं संस्था के द्वारा योजना बनाकर उन्हे लाभान्वित करना ।
- समूह के पारिवारिक सभी सदस्यों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा, रोजगार एवं स्वरोजगार में हर तरह से उनके बीच पारस्परिक संबंध स्थापित करना ।
नियम एवं शर्तें
- स्वयं सहायता समूह का निर्माण में एक बेहतर चरणबद्ध प्रक्रिया हो जो लोकतान्त्रिक ढंग से कार्य करे जिसमें सभी सदस्यों की विचारधारा मे अच्छी ताल-मेल व सहभागिता हों ।
- समूह मे सदस्यों की संख्या 10 से 20 श्रमिकों/लोगों की होनी चाहिए
- समूह निबंधित भी हो सकता है और नहीं भी ।
- समूह के पिछले अभिलेखों (रिकार्ड) मे सभी सदस्यों का लेन देन सही होना चाहिए ताकि एक स्वस्थ समूह के साथ स्थापना करने और निधि/बैंक से जुड़ बचत करना या कर्ज /ऋण लेने में आसानी हो सकें ।
- समूह के लोकतान्त्रिक मान्य अधिकारी अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष में से किन्ही दो के हस्ताक्षरित से ही निधि/बैंक में समूह की बचत खाता खुलेगी ।
- आंतरिक बचत प्रक्रिया ही समूह की मूल बढ़त है इसलिए समूह की सदस्यता रोजाना/साप्ताहिक/मासिक जमा गति में रहें ।
- समूह अपनी आचार संहिता खुद बनाएगा ताकि वो सभी सदस्यों मे बेहतर ताल मेल बना रहें ।
- समूह खुद तय करेगा की ऋण/कर्ज किस सदस्य को किस उद्देश्य के लिए देना है या नहीं देना है ।
- समूह खुद अपने सदस्यों हेतु ऋण/कर्ज राशि सुनिश्चित करेगा ।
- समूह मे दिए गए ऋण/कर्ज को ब्याज दर या जमा सदस्यता राशि का ब्याज दर निधि/बैंक या संस्था के विचार विमर्श पर ही जारी होगा ।
- श्रमिक फाउंडेशन द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूह में इनकी बचत एवं ऋण संबंधी सभी कार्य श्रम इंडिया निधि लिमिटेड के साथ करने की प्राथमिकता देगी ।
- समूह को सभी अभिलेखों (रिकार्ड) रखना होगा ।
- समूह को ऋण/कर्ज से पहले छः महीनों की सक्रियता दिखानी होगी साथ साथ किसी अन्य दूसरें बैंक या संस्थाओं मे किसी लेन देन गड़बड़ी (डिफ़ॉल्टर) ना हों ।
- समूहों की स्थापना में औचित्य एवं मूल उदेशयों से निधि/बैंक संतुष्ट हों ।
- श्रमिक फाउंडेशन आप सभी स्वयं सहायता समूह के श्रमिकों/लोगों के बीच कम से कम साधारण सदस्यता शुल्क लेगी जो प्रति वर्ष बाध्य होगा ।
श्रमिक फाउंडेशन अपने देश व राज्य की सभी महिला एवं पुरुष श्रमिकों के परिवार के लिए उत्तम स्वास्थ्य, रोजगार , बेहतर शिक्षा के साथ साथ उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है।